शितलाष्टमी: पूजा और विधि
शितलाष्टमी एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जो भारत में मनाया जाता है। यह त्योहार शीतला माता की पूजा करने के लिए मनाया जाता है, जिन्हें अमावस्या के दिन यानी फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अठवां तिथि को पूजा जाता है।
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4/2/20241 min read


शितलाष्टमी: पूजा और विधि
शितलाष्टमी एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जो भारत में मनाया जाता है। यह त्योहार शीतला माता की पूजा करने के लिए मनाया जाता है, जिन्हें अमावस्या के दिन यानी फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अठवां तिथि को पूजा जाता है। यह पूजा भारत के विभिन्न हिस्सों में विशेष धूमधाम के साथ मनाई जाती है। शीतलाष्टमी का पावन पर्व हमें यह याद दिलाता है कि हमें स्वास्थ्य और रोगनिवारण की देवी का आशीर्वाद कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इस अवसर पर हमें अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्यार और भाईचारे का संदेश भी देना चाहिए।
शीतलाष्टमी के दिन अक्सर ठंडे खाने बनाए जाते हैं। यह एक परंपरागत रूप है जिसे कुछ समाजों में पालन किया जाता है। ठंडे खाने को तब तैयार किया जाता है जब बाहर की तापमान बहुत अधिक होती है और लोगों को ठंडा खाना सुखद लगता है।
ठंडे खाने में आमतौर पर आलू की सब्जी, पूरी, कचौड़ी, दही वगैरह शामिल होते हैं। इनमें से कई आलू की सब्जियां और कचौड़ी बिना बिना गरम मसाले के बनाई जाती हैं ताकि ये ठंडे खाने के रूप में सेवित किए जा सकें।
इस प्रकार के भोजन को ठंडे खाने कहा जाता है क्योंकि इसमें कम गरम मसाले होते हैं और यह शीतला माता की पूजा में उपयुक्त माना जाता है। यह भोजन लोगों को ठंडा और ताजगी देता है और उन्हें शीतलाष्टमी के पर्व का आनंद भी मिलता है।
पूजा की तैयारी
शितलाष्टमी की पूजा के लिए विशेष तैयारी की जाती है। पूजा के लिए आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता होगी:
शितला माता की मूर्ति
पूजा सामग्री जैसे दीपक, धूप, अगरबत्ती, रोली, चावल, कलश, नारियल, फूल आदि
पूजा के लिए विशेष वस्त्र
पूजा के लिए विशेष भोग
पूजा विधि
शितलाष्टमी की पूजा को निम्नलिखित विधि के अनुसार किया जाता है:
पूजा के लिए स्वच्छ और शुद्ध स्थान का चयन करें।
शितला माता की मूर्ति को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
मूर्ति को गंध, दीपक, धूप, अगरबत्ती, रोली, चावल, कलश, नारियल आदि से सजाएं।
माँ शितला के चरणों को जल चढ़ाएं और मन्त्रों का जाप करें।
पूजा के बाद, विशेष भोग को माँ शितला को अर्पित करें।
अंत में, आरती गाएं और प्रसाद वितरित करें।
शितलाष्टमी के महत्वपूर्ण त्योहार
शीतलाष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा के अलावा, कई अन्य रीतियों और परंपराओं को भी पालन किया जाता है। यहां कुछ अधिक जानकारी दी जा रही है:
पूजा और आरती: शीतला माता की पूजा के दौरान उनकी मूर्ति या छवि को सजा कर पूजा की जाती है। इसके साथ ही भक्तों द्वारा आरती भी उतारी जाती है। वे मंत्रों और भजनों के साथ माँ शीतला को प्रणाम करते हैं।
व्रत और उपवास: कुछ लोग शीतलाष्टमी के दिन व्रत रखते हैं और उपवास करते हैं। वे अन्न, नमक और तेल का त्याग करते हैं और केवल फल और दूध का सेवन करते हैं।
चादर की दान: कुछ लोग माँ शीतला की पूजा में चादर का दान करते हैं। इसके लिए, एक साफ और नए कपड़े की चादर को धोकर उसे माँ शीतला की मूर्ति के सामने रखा जाता है। फिर उसे पूजा के बाद गरीबों या आवश्यकतमंद लोगों को दान में दी जाती है।
सेवा और दान: शीतलाष्टमी के दिन लोग अक्सर अन्य लोगों की सेवा करने और धन या अन्य सामग्री का दान करते हैं। यह एक पुण्यकारी कृत्य होता है और माँ शीतला की कृपा को आकर्षित करने में सहायक होता है।
यह सभी रीतियां और परंपराएं शीतलाष्टमी के दिन मान्यता से प्रथमा की जाती हैं। यहां ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रत्येक क्षेत्र में कुछ छोटे-मोटे भिन्नताएँ हो सकती हैं, जैसे कि कुछ स्थानों पर केवल पूजा होती है और कुछ स्थानों पर उपवास भी।
शितलाष्टमी को भारत में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्वपूर्ण भाग दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में मान्यता प्राप्त है।
शितलाष्टमी का महत्व यह है कि इस दिन लोग शितला माता की पूजा कर उनसे अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य की कामना करते हैं। यह त्योहार विषम मौसम की वजह से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
शितलाष्टमी के दौरान, लोग विशेष भोग बनाते हैं जैसे कि चावल की खिचड़ी, बाजरे की रोटी, उड़द दाल, चने की दाल, लौकी की सब्जी आदि। इन भोजनों को माँ शितला को अर्पित करके खाया जाता है और इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
शितलाष्टमी एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है जो शितला माता की पूजा करने के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान लोग शितला माता की कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं और अपने घरों और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।